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User:Gonu2010

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asian medical institute, kyrgyzstan , bishkek ,kant

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murder in kyrgyzstan(asian medical institute,kant) नीरज की गत सात मई को किर्गिस्तान में संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। शुक्रवार को उसका शव दरभंगा लाया गया। शव के पहुंचते ही वहां का माहौल गमगीन हो गया। परिजनों की चीत्कार से वातावरण दहल उठा। नीरज के परिजनों ने उसकी हत्या किये जाने की आशंका जतायी है तथा इस बाबत डा. रमण ने विदेश मंत्रालय के साथ ही बिहार सरकार व मधुबनी जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने बिस्केक में छात्रों का नामांकन कराने में सक्रिय वाराणसी के प्रशांत नामक बिचौलिए व वहीं के भूपेंद्र नामक एक छात्र की भूमिका को संदिग्ध बताया है। परिजनों के मुताबिक प्रशांत की गहरी पैठ बिस्केक स्थित दूतावास में भी है। वहां संपर्क करने पर उसी से बात कराई जाती थी। प्रशांत ने शव भेजने के लिए 1.60 लाख रुपए भी मांगे थे। कुछ पैसा यहां से भेजा भी गया। गौरतलब है कि डा. रमण मधुबनी जिले के अरेड़ थाने के चननपुर गांव के निवासी हैं। वे गंगवाड़ा में मकान बना कर रह रहे हैं। नीरज छोटा पुत्र था। उसने दरभंगा के एमएलएसएम कालेज से इंटर की डिग्री ली थी। इसके बाद दिल्ली चला गया और पिछले साल उसने अपना नामांकन बिस्केक स्थित एशियन मेडिकल इंस्टीट्यूट में कराया था। परिजनों ने कहा कि नीरज वहां प्रशांत द्वारा संचालित हास्टल में रहता था। प्रशांत पैसे के लिए बार-बार दबाव देता था। इसको लेकर नीरज का उससे मतभेद हो गया। एक सप्ताह पहले वह प्रशांत का हास्टल छोड़ अलग रहने लगा। 17 मई को नीरज यहां आने वाला था, लेकिन 7 मई को उसकी मौत हो गई तथा उसी सुबह इसकी खबर यहां आई। फोन से संपर्क करने पर बताया गया कि एक पार्टी के दौरान कमरे में धुआं भरने के कारण दम घुटने से नीरज की मौत हो गई। बिस्केक में नीरज के दोस्तों से जब परिजनों ने यहां से संपर्क साधा तो एक मित्र से भूपेंद्र नामक लड़के का नाम उसकी कथित हत्या में सामने आया। नीरज के परिजनों ने बताया कि उससे जब संपर्क किया गया तो पहले उसने पार्टी में जाने की बात से ही इनकार किया। बाद में कहा कि वह पार्टी में गया था, लेकिन तुरंत चला आया। परिजनों ने अन्य मित्रों से संपर्क कर नीरज का फोटो मंगवाया। उसके शरीर पर कई निशान दिखे। जिससे हत्या की आशंका पुष्ट होती है। और फोटो मंगवाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन प्रशांत ने तस्वीर भेजने से रोक दिया। परिजनों ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि इस मामले को लेकर जब किर्गिस्तान में दूतावास से संपर्क साधा गया तो उनकी बात प्रशांत से कराई गई।शुक्रवार की शाम जब नीरज का शव दरभंगा लाया गया तो पिछले आठ दिनों से शोक में डूबे परिजनों की पीड़ा बांध तोड़कर बाहर निकल पड़ी और पूरा माहौल आंसुओं में डूब गया। मोहल्ले के लोगों की भीड़ भी उमड़ आई थी।

[[Media:नीरज की गत सात मई को किर्गिस्तान में संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई। शुक्रवार को उसका शव दरभंगा लाया गया। शव के पहुंचते ही वहां का माहौल गमगीन हो गया। परिजनों की चीत्कार से वातावरण दहल उठा। नीरज के परिजनों ने उसकी हत्या किये जाने की आशंका जतायी है तथा इस बाबत डा. रमण ने विदेश मंत्रालय के साथ ही बिहार सरकार व मधुबनी जिला प्रशासन से गुहार लगाई है। उन्होंने बिस्केक में छात्रों का नामांकन कराने में सक्रिय वाराणसी के प्रशांत नामक बिचौलिए व वहीं के भूपेंद्र नामक एक छात्र की भूमिका को संदिग्ध बताया है। परिजनों के मुताबिक प्रशांत की गहरी पैठ बिस्केक स्थित दूतावास में भी है। वहां संपर्क करने पर उसी से बात कराई जाती थी। प्रशांत ने शव भेजने के लिए 1.60 लाख रुपए भी मांगे थे। कुछ पैसा यहां से भेजा भी गया। गौरतलब है कि डा. रमण मधुबनी जिले के अरेड़ थाने के चननपुर गांव के निवासी हैं। वे गंगवाड़ा में मकान बना कर रह रहे हैं। नीरज छोटा पुत्र था। उसने दरभंगा के एमएलएसएम कालेज से इंटर की डिग्री ली थी। इसके बाद दिल्ली चला गया और पिछले साल उसने अपना नामांकन बिस्केक स्थित एशियन मेडिकल इंस्टीट्यूट में कराया था। परिजनों ने कहा कि नीरज वहां प्रशांत द्वारा संचालित हास्टल में रहता था। प्रशांत पैसे के लिए बार-बार दबाव देता था। इसको लेकर नीरज का उससे मतभेद हो गया। एक सप्ताह पहले वह प्रशांत का हास्टल छोड़ अलग रहने लगा। 17 मई को नीरज यहां आने वाला था, लेकिन 7 मई को उसकी मौत हो गई तथा उसी सुबह इसकी खबर यहां आई। फोन से संपर्क करने पर बताया गया कि एक पार्टी के दौरान कमरे में धुआं भरने के कारण दम घुटने से नीरज की मौत हो गई। बिस्केक में नीरज के दोस्तों से जब परिजनों ने यहां से संपर्क साधा तो एक मित्र से भूपेंद्र नामक लड़के का नाम उसकी कथित हत्या में सामने आया। नीरज के परिजनों ने बताया कि उससे जब संपर्क किया गया तो पहले उसने पार्टी में जाने की बात से ही इनकार किया। बाद में कहा कि वह पार्टी में गया था, लेकिन तुरंत चला आया। परिजनों ने अन्य मित्रों से संपर्क कर नीरज का फोटो मंगवाया। उसके शरीर पर कई निशान दिखे। जिससे हत्या की आशंका पुष्ट होती है। और फोटो मंगवाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन प्रशांत ने तस्वीर भेजने से रोक दिया। परिजनों ने इस बात पर आश्चर्य प्रकट किया कि इस मामले को लेकर जब किर्गिस्तान में दूतावास से संपर्क साधा गया तो उनकी बात प्रशांत से कराई गई।शुक्रवार की शाम जब नीरज का शव दरभंगा लाया गया तो पिछले आठ दिनों से शोक में डूबे परिजनों की पीड़ा बांध तोड़कर बाहर निकल पड़ी और पूरा माहौल आंसुओं में डूब गया। मोहल्ले के लोगों की भीड़ भी उमड़ आई थी। ]]